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5 तरह की होती है à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€, जानें इसके कारण लकà¥à¤·à¤£ और उपचार
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ तब उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होती है, जब शरीर किसी पदारà¥à¤¥ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करता है। लापरवाही बरतने पर à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ मामूली से कठिन समसà¥à¤¯à¤¾ बन सकती है। वह पदारà¥à¤¥ जिसके कारण शरीर में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ होती है, à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¨ कहलाता है। आइठजानते हैं à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के संदरà¥à¤
अपने जीवन काल में लगà¤à¤— हर वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ कà¤à¥€ न कà¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की समसà¥à¤¯à¤¾ से गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ होता है। à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ तब उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होती है, जब शरीर किसी पदारà¥à¤¥ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करता है। लापरवाही बरतने पर à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ मामूली से कठिन समसà¥à¤¯à¤¾ बन सकती है। वह पदारà¥à¤¥ जिसके कारण शरीर में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ होती है, à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¨ कहलाता है। आइठजानते हैं à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के संदरà¥à¤ में कà¥à¤› महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ जानकारियां
à¤à¤Ÿà¥‰à¤ªà¤¿à¤• डरà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸
à¤à¤Ÿà¥‰à¤ªà¤¿à¤• डरà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ à¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार है, जिसमें तà¥à¤µà¤šà¤¾ में सूजन आ जाती है। यह à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ बचपन में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है। उमà¥à¤° बà¥à¤¨à¥‡ के साथ इसकी तीवà¥à¤°à¤¤à¤¾ कम हो जाती है।
à¤à¤¸à¥‡ पहचानें
इस मरà¥à¤œ के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में दरà¥à¤¦, खà¥à¤œà¤²à¥€, छाले पड़ना, छाले फूटकर पानी निकलना, जलन होना, मà¥à¤‚ह के कोनों का फटना, बार-बार तà¥à¤µà¤šà¤¾ का संकà¥à¤°à¤®à¤£ आदि समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो सकती हैं।
पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारण
à¤à¤Ÿà¥‰à¤ªà¤¿à¤• डरà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारकों में परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ पà¥à¤°à¤¦à¥‚षण, रासायनिक पà¥à¤°à¤¦à¥‚षण और धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤®à¥à¤– हैं। मौजूदा फैशन के दौर में पà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• की चीजें व कॉसà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• के पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— जैसे नकली आà¤à¥‚षण, बिंदी, परफà¥à¤¯à¥‚म और पाउडर, साबà¥à¤¨ आदि का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² बॠगया है। इन पदारà¥à¤°à¥à¤¥à¥‹à¤‚ के संपरà¥à¤• में आने पर à¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो जाती है।
यह है इलाज
तà¥à¤µà¤šà¤¾ की नमी बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ वाले मरहम और खà¥à¤œà¤²à¥€ कम करने वाली दवाओं का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है। à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से होने वाले संकà¥à¤°à¤®à¤£ के इलाज के लिठà¤à¤‚टीबॉयोटिकà¥à¤¸ का à¤à¥€ इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है।
नाक की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• राइनाइटिस या नाक की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ विशेष रूप से पराग कणों के कारण मौसम बदलने के दौरान होती है। इससे नाक के वायà¥à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— में सूजन आ जाती है और छींकें, नाक में खà¥à¤œà¤²à¥€ व पानी और नाक का बंद हो जाना जैसे लकà¥à¤·à¤£ पà¥à¤°à¤•ट होते हैं। à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की वजह से साइनस में सूजन आ जाती है जिसे हम साइनà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ कहते हैं। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की परेशानी यदि लंबे समय तक बनी रहती है तो कान बहना, कान में दरà¥à¤¦, कम सà¥à¤¨à¤¨à¤¾, बहरापन जैसी परेशानियां à¤à¥€ हो सकती हैं। हमारे शरीर की संरचना के हिसाब से नाक, कान और गला आपस में किसी न किसी माधà¥à¤¯à¤® से जà¥à¥œà¥‡ होते हैं। इसलिठइनमें से किसी में à¤à¥€ संकà¥à¤°à¤®à¤£ होने या सूजन आने पर सà¤à¥€ पर असर होता है।
दमा
यह मरà¥à¤œ à¤à¥€ अधिकतर à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के कारण होता है। दमा में वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की सांस की नलियां (बà¥à¤°à¥‰à¤¨à¥à¤•ाई) पैदाइशी रूप से अति संवेदनशील होती हैं। à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ के संपरà¥à¤• में आने पर इनमें सूजन व सिकà¥à¥œà¤¨ आ जाती है, जिससे वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की सांस फूलने लगती है। वायॠपà¥à¤°à¤¦à¥‚षण, धूल, धà¥à¤†à¤‚, गरà¥à¤¦à¤¾, सीलन व परागकण à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होने के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारण हैं, जो दमा (असà¥à¤¥à¤®à¤¾) को बà¥à¤¾à¤µà¤¾ देते हैं।
दमा रोगियों के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– लकà¥à¤·à¤£
छींक या खांसी आना,सांस फूलना, सीने में दरà¥à¤¦ और गले से à¤à¤• असामानà¥à¤¯ आवाज आना दमा के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– लकà¥à¤·à¤£ हैं। इस मरà¥à¤œ के निदान के लिठफेफड़े की कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ की जांच (पलà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤°à¥€ फंकà¥à¤¶à¤¨ टेसà¥à¤Ÿ) किया जाता है। इसका उपचार डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह से इनà¥à¤¹à¥‡à¤²à¤° चिकितà¥à¤¸à¤¾ लेना है।
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• कॅनà¥à¤œà¤‚कà¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸
आंखों में होने वाली à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ को à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• कॅनà¥à¤œà¤‚कà¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ à¤à¥€ कहते हैं। यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ तब उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होती है, जब à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¨ आंख की उपरी सतह पर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ कॅनà¥à¤œà¤‚कà¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¾ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती है। इस à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में आंखों से पानी आना, खà¥à¤œà¤²à¥€ होना, आंखों में लालिमा, सूजन और जखà¥à¤® होने को शामिल किया जाता है।
दवाओं से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€
दवाओं से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ बहà¥à¤¤ वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• है, पर हर वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के शरीर पर इसके अलग-अलग असर देखने को मिल सकते हैं। किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के शरीर पर चकतà¥à¤¤à¥‡ और खà¥à¤œà¤²à¥€ हो सकती है, वहीं हो सकता है दूसरे को कोई दिकà¥à¤•त न हो। दवाओं के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ देखी जाती है। जैसे कà¥à¤› à¤à¤‚टीबॉयोटिकà¥à¤¸ और पेनकिलरà¥à¤¸ आदि के इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करने पर।
खादà¥à¤¯ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€
इस तरह की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ में हमारा पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ तंतà¥à¤° (इमà¥à¤¯à¥‚निटी सिसà¥à¤Ÿà¤®) à¤à¥‹à¤œà¤¨ में शामिल किसी खास पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ अतिसंवेदनशीलता पà¥à¤°à¤•ट करता है। à¤à¤¸à¥‡ खाने की थोड़ी सी मातà¥à¤°à¤¾ लेने से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के लकà¥à¤·à¤£ पà¥à¤°à¤•ट होने लगते हैं।
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का इलाज
दवाओं का सही व नियमित पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करना चाहिà¤à¥¤
कई पà¥à¤°à¤•ार की दवाà¤à¤‚ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को रोकने के लिठपà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— की जाती हैं।
इमà¥à¤¯à¥‚नो थेरेपी से à¤à¥€ इलाज किया जाता है।
à¤à¤¸à¥‡ करें बचाव
पालतू पशà¥à¤“ं के बाल, धूल के कण आदि से बचाव à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के उपचार का à¤à¤• महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ पहलू है।
जिस खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ या माहौल से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो, उससे बचने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करें।
रसायनों के संपरà¥à¤• से बचना चाहिà¤à¥¤
à¤à¤¸à¥‡ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ (जिनसे शरीर में à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होती है) से बचना चाहिà¤à¥¤ यही फूड à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का मà¥à¤–à¥à¤¯ इलाज है।
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